0123463 visits since 05 May, 2021

Ice Age In Hindi Site

पर सबसे गहरा दृश्य था— एक माँ का अपने बच्चे को सीने से लगाए बर्फ़ीले तूफ़ान में बैठना। उसकी आँखों में डर नहीं था, बल्कि वो आग थी, जो हर जमी हुई रात को पिघला सकती थी— अगर वक़्त उसका साथ देता।

यहाँ प्रस्तुत है आइस एज (हिम युग) पर एक गहन और भावनात्मक रचना (हिंदी कविता/गद्यांश):

आज भी जब हम ठंड से काँपते हैं, या अकेलेपन में जम जाते हैं— समझ लेना, हम उसी हिम युग के बचे-खुचे किरदार हैं। बस फ़र्क इतना है— अब बर्फ़ बाहर नहीं, भीतर है। ice age in hindi

हिम युग ने सिखाया— जीवन का असली अर्थ ठहराव नहीं, बल्कि रुक कर भी चलते रहने का नाम है। जब हर चीज़ जम जाती है, तब भी अंदर कहीं एक बीज साँस लेता है। और उसी बीज में छिपा होता है अगले युग का पहला पत्ता।

जब धरती ने अपना अंगारा ठंडा कर लिया, और सूरज भी दूर जाता हुआ एक याद बन गया। तब नदियाँ रुक गईं, गुनगुनाना भूल गईं। पेड़ों ने अपनी छाल उतार दी, और हवा ने शब्द खो दिए। बल्कि वो आग थी

और असली संघर्ष अब भी वही है: पिघलना, या पिघलाना। जीवित रहना, या सिर्फ़ सहना। यदि आप चाहें तो मैं इसी विषय पर कोई भी लिख सकता हूँ। बस संकेत दीजिए।

सब ख़त्म होने के बाद भी, बचता है एक स्वर। वो स्वर था—हिम युग का। या पिघलाना। जीवित रहना

उस युग में जीवित रहना मतलब था— हर साँस को संजोना, हर दिन से मोल-भाव करना। बर्फ़ सिर्फ़ मौसम नहीं थी, वो एक दीवार थी, एक चुप्पी थी, एक अनदेखा युद्ध था, जहाँ हार का मतलब था—गुमनामी।